SSC घोटाले पर भड़के अखिलेश यादव – क्यों दिल्ली में छात्रों और शिक्षकों पर बरसी लाठी?
दिल्ली के जंतर मंतर पर उस समय हड़कंप मच गया जब SSC परीक्षा में धांधली और भर्ती में देरी को लेकर हजारों छात्र एकजुट हो गए। इन छात्रों के समर्थन में उतरे देश के दो बड़े शिक्षक – नीतू सिंह मैम और अभिनव शर्मा – जब खुद प्रदर्शन में शामिल हुए तो पुलिस की कार्रवाई ने सबको हैरान कर दिया। लाठीचार्ज धक्कामुक्की और टीचर्स को जबरन खींच ले जाने जैसी घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गए।
जैसे ही ये वीडियो वायरल हुआ देशभर में विरोध की लहर दौड़ पड़ी। छात्रों का आरोप है कि SSC (Staff Selection Commission) की परीक्षाएं न केवल लेट होती हैं, बल्कि उनमें बार-बार गड़बड़ी और पेपर लीक की खबरें आती रहती हैं। इस बीच पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव उस वक्त और बढ़ गया जब शिक्षक अभिनव शर्मा की पुलिस से बहस का वीडियो सामने आया।
इस मामले पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने X (Twitter) पर लिखा:
“छात्रों की आवाज को दबाने की कोशिश हो रही है। मोदी सरकार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। हम छात्रों के साथ हैं।
वहीं भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ने भी बयान जारी किया कि "सरकार को युवाओं के धैर्य की परीक्षा लेना बंद करना चाहिए नहीं तो अगला आंदोलन उससे बड़ा होगा जो देश ने पहले कभी नहीं देखा।"
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मांग रखी कि SSC परीक्षाओं में पारदर्शिता हो समय से रिजल्ट आए और पेपर लीक जैसे मामलों पर सख्त कार्रवाई हो। लेकिन पुलिस की हिंसक कार्रवाई ने आंदोलन को और आक्रोशित कर दिया।
नीतू मैम और अभिनव सर को क्यों किया गया गिरफ्तार?
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई छात्रों को हिरासत में लिया साथ ही नीतू मैम और अभिनव सर को भी अलग-अलग वैन में बैठाकर दूर स्थानों पर ले जाया गया। आरोप है कि पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन भड़काने के आरोप में उठाया जबकि दोनों शिक्षक शांति से छात्रों के साथ खड़े थे।
अभिनव शर्मा ने बाद में बयान दिया कि सरकार को छात्रों की मांग सुननी चाहिए, वरना यह आंदोलन और भी बड़ा रूप ले सकता है।
अब आगे क्या?
सोशल मीडिया पर #SSC_Protest ट्रेंड कर रहा है। देशभर के छात्रों में गुस्सा है और कई बड़े शिक्षकों नेताओं और आम जनता ने भी इस कार्रवाई की निंदा की है। अब देखना होगा कि सरकार इस आंदोलन को कैसे संभालती है –छात्रों से बातचीत करेगी या फिर दबाव से।
छात्रों की मांग साफ है: भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, समयबद्ध रिज़ल्ट और निष्पक्ष जांच। और अगर यह नहीं हुआ तो अगली बार आंदोलन सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा।
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