SSC घोटाला: पैसों के चक्कर में बर्बाद किया 30 लाख बच्चों का भविष्य।
सोचिए जब एक छात्र दिन-रात मेहनत करता है सालों तक कोचिंग में लाखों रुपये खर्च करता है और मन लगाकर पढ़ाई करता है। फिर भी उसका सपना सिर्फ इसलिए टूट जाए क्योंकि सिस्टम ने उसे धोखा दे दिया... यही हो रहा है SSC परीक्षा के लाखों छात्रों के साथ।
2025 की SSC परीक्षाएं घोटाले और विवादों से इतनी घिरी हुई हैं कि अब पूरा देश सवाल पूछ रहा है — क्या वाकई 30 लाख छात्रों का भविष्य पैसों के लिए बर्बाद कर दिया गया?
SSC ने किस एक ऐसी कंपनी को ठेका दिया? जो पहले से विवादों से घिरी थीं।
इस बार SSC ने पेपर कराने का ठेका Eduquity Career Technologies Pvt. Ltd. नाम की कंपनी को दिया है। इससे पहले सालों तक ये काम TCS (Tata Consultancy Services) कर रही थी जिसकी छवि बेहद भरोसेमंद रही है। लेकिन 2025 में टेंडर प्रक्रिया के दौरान Eduquity ने सबसे कम बोली लगाई और सरकार ने TCS से छीनकर Eduquity कंपनी को ठेका दे दिया।
Eduquity ने ₹171 प्रति छात्र की दर से कॉन्ट्रैक्ट लिया जो TCS की तुलना में सस्ता था। लेकिन यहीं से शुरू हो गई समस्याएं।
Eduquity का पुराना रिकॉर्ड ही सवालों में!
Eduquity पर इससे पहले भी कई गंभीर आरोप लग चुके हैं। MP TET 2022 और MP Patwari 2023 जैसी परीक्षाओं में पेपर लीक और तकनीकी गड़बड़ियों के कारण इस कंपनी की विश्वसनीयता पहले ही सवालों में थी।
इतना ही नहीं कुछ राज्यों में तो Eduquity को ब्लैकलिस्ट भी किया गया था। फिर भी SSC ने उसी कंपनी को इतनी बड़ी परीक्षा का जिम्मा सौंप दिया जिससे अब पूरे सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं।
क्या हुआ SSC Phase‑13 परीक्षा में?
24 जुलाई से शुरू हुई SSC Selection Post Phase‑13 परीक्षा के दौरान देशभर के सैकड़ों सेंटरों से शिकायतें आईं:
- सिस्टम बार-बार क्रैश होना
- प्रश्न पत्र खुल ही नहीं रहे थे
- परीक्षा बीच में ही बंद कर दी गई
- कई छात्रों को केंद्र में प्रवेश नहीं मिला
- कुछ छात्रों को पेपर देने के बाद भी “Absent” दिखाया गया
कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर वीडियो और सबूत शेयर किए हैं कि कैसे उनका सालों की मेहनत एक झटके में खत्म कर दिया गया।
क्या वाकई 30 लाख छात्रों का भविष्य बर्बाद कर दिया?
SSC की इस परीक्षा में लगभग 30 लाख छात्र रजिस्टर्ड थे। इनमें से कई ऐसे भी थे जो आखिरी बार मौका ले रहे थे। लेकिन सिस्टम की नाकामी और लापरवाही ने इनका भविष्य दांव पर लगा दिया।
जो छात्र दूर-दराज से ट्रेन पकड़कर परीक्षा देने आए थे, उन्हें बिना परीक्षा दिए लौटना पड़ा। ये सिर्फ एक तकनीकी फेलियर नहीं बल्कि छात्रों के सपनों की हत्या है।
TCS का नाम क्यों आया विवाद में?
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि कुछ केंद्रों पर TCS के पुराने ऑपरेटरों ने परीक्षा में बाधा डाली। लेकिन TCS ने इन आरोपों को बेसलेस और झूठा” बताते हुए खारिज कर दिया है। यह साफ कर दिया गया है कि अब SSC की परीक्षा से TCS का कोई लेना-देना नहीं है।
TCS का नाम घसीटना सिर्फ ध्यान भटकाने की कोशिश थी। असल जिम्मेदारी SSC और Eduquity की है।
छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा!
दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हो रहे हैं। छात्रों और कोचिंग संस्थानों ने SSC के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। “#SSCScam2025”, “#Eduquity_Hatao_SSC_Bachao” जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
लेकिन सरकार और SSC अभी तक पूरी तरह चुप हैं। न कोई जांच का ऐलान न कोई समस्या का समाधान। सरकार की यही चुप्पी छात्रों को और आक्रोशित कर रही है।
क्या मांगें हैं छात्रों की?
- Eduquity से ठेका तुरंत छीना जाए
- CBI से निष्पक्ष जांच हो
- रद्द परीक्षाएं दोबारा कराई जाएं
- SSC अध्यक्ष और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हो
ये आंदोलन अब सिर्फ एक परीक्षा को लेकर नहीं है ये सिस्टम के खिलाफ लड़ाई बन चुकी है।
अगर आप भी चाहते हैं कि मेहनत करने वाले छात्रों को उनका हक मिले, तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर जरूर करें।
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