पटना की सड़कों पर फूटा गुस्सा! STET छात्रों का 'TRE 4 के खिलाफ महा विद्रोह!
गुरुवार को राजधानी पटना की सड़कों पर अचानक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया। STET (स्टेट टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) के सैकड़ों अभ्यर्थी सरकार की नीति के खिलाफ सड़क पर उतर आए और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इन छात्रों की मांग साफ थी — जब तक STET की परीक्षा नहीं होती और उसका रिजल्ट जारी नहीं होता तब तक TRE 4 की परीक्षा मत कराओ
यह आंदोलन अचानक नहीं हुआ बल्कि पिछले कई महीनों से अभ्यर्थी सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार को चेतावनी देते आ रहे थे। पर जब उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया तब उन्होंने सड़कों पर उतरकर अपना आक्रोश जताया। पुलिस की तैनाती बैरिकेडिंग और बीच-बीच में लाठीचार्ज की खबरें इस बात का सबूत हैं कि यह सिर्फ विरोध नहीं एक बड़ा जन आंदोलन था।
छात्रों की मांगें क्या हैं?
छात्रों का कहना है कि सरकार TRE 4 भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर रही है जबकि अब तक STET की परीक्षा तक नहीं कराई गई। ऐसे में नए टीचर की भर्ती की प्रक्रिया कैसे न्यायसंगत हो सकती है? उनकी प्रमुख मांगें इस तरह हैं:
- पहले STET परीक्षा कराई जाए।
- उसका रिजल्ट विधानसभा चुनाव से पहले जारी हो।
- TRE 4 परीक्षा प्रक्रिया STET के बाद शुरू हो।
छात्रों का यह भी आरोप है कि सरकार केवल परीक्षा की तारीखें घोषित करती है लेकिन जब तक परीक्षाएं नहीं कराई जाती है और परिणाम नहीं आते तब तक छात्र अनिश्चितता में ही जीते हैं।
सरकार की चुप्पी पर सवाल
अब तक सरकार की तरफ से इस मुद्दे पर कोई ठोस बयान नहीं आया है। न तो शिक्षा विभाग ने कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है और न ही बिहार सरकार के किसी मंत्री ने छात्रों को आश्वस्त किया है। इससे छात्रों में असंतोष और अधिक बढ़ता जा रहा है।
कुछ छात्र संगठनों ने भी सरकार पर सवाल उठाए हैं कि बार-बार परीक्षा प्रक्रिया को टालना केवल छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है साथ ही ये भी आरोप लगाए गए कि विधानसभा चुनाव से पहले युवाओं को सिर्फ लॉलीपॉप दी जा रही है। असली नौकरी नहीं।
बेरोजगारी बनाम वादों की राजनीति
बिहार में बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा है और शिक्षकों की भर्तियों को लेकर वर्षों से उथल-पुथल मची हुई है। हर चुनाव में युवाओं से रोजगार के वादे किए जाते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि आज भी हजारों योग्य युवा STET पास करने की प्रतीक्षा में भटक रहे हैं।
TRE 4 की परीक्षा प्रक्रिया उन छात्रों के लिए एक और झटका बनकर आई जो पहले से ही STET के आयोजन और परिणाम के इंतजार में हैं। ऐसे में अगर सरकार इन मांगों को जल्द नहीं मानती। तो आंदोलन और उग्र हो सकता है — और इसका सीधा असर आगामी चुनावों पर भी पड़ सकता है।
सोशल मीडिया पर उबाल
STET छात्रों का यह आंदोलन सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रहा। ट्विटर फेसबुक, इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर #STETProtest और #TRE4_Stop जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। छात्रों ने वीडियो पोस्ट कर सरकार से जवाब माँगा और यह आंदोलन अब राज्य की सीमाओं को लांघकर एक राष्ट्रीय बहस बन चुका है।
क्या आगे और भड़केगा आंदोलन?
अभी तक छात्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया है, लेकिन अगर सरकार ने जल्द ही उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो यह आंदोलन बिहार में एक बड़ा छात्र विद्रोह बन सकता है। शिक्षक भर्ती जैसे संवेदनशील विषय पर सरकार की चुप्पी अब भारी पड़ सकती है।
अब देखना होगा कि सरकार अगला कदम क्या उठाती है — STET की परीक्षा की तारीख घोषित करती है या आंदोलन को कुचलने का प्रयास। लेकिन एक बात तय है। बिहार के युवा अब चुप नहीं बैठेंगे बह अब आंदोलन करेंगे और सड़कों पर उतरेंगे।
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