विद्यालय मर्जर को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा / हाईवे जाम कर जताया विरोध
गांव की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर से ग्रामीणों का गुस्सा फूटा है। इस बार मामला विद्यालय मर्जर का है, जिसमें प्रशासन द्वारा पास के दो स्कूलों को मिलाकर एक कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि इससे बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ेगा। खासकर छोटे बच्चों को अब दूर के गांव जाना पड़ेगा जो उनके लिए असुरक्षित और असुविधाजनक होगा।
यह मामला आज सुबह तब गरमाया जब गांव के सैकड़ों लोगों ने एकजुट होकर स्थानीय हाईवे पर जाम लगा दिया। महिलाएं, बुजुर्ग युवा और बच्चे – सभी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। हाथों में तख्तियां लेकर वे नारेबाजी कर रहे थे और शिक्षा विभाग से अपना फैसला वापस लेने की मांग कर रहे थे।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि उनका स्कूल वर्षों पुराना है और उसमें आधारभूत सुविधाएं भी मौजूद हैं। अगर प्रशासन को किसी स्कूल को बंद करना ही था तो दूसरे गांव का कमज़ोर स्कूल बंद किया जाता न कि उनका। कुछ माता-पिता ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन ने यह फैसला बिना ग्रामीणों की राय लिए ही ले लिया, जो पूरी तरह गलत है।
विरोध प्रदर्शन की सूचना मिलते ही पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन लोग पीछे हटने को तैयार नहीं थे। जाम करीब तीन घंटे तक रहा, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। आखिरकार अधिकारियों ने जांच और उच्च स्तरीय मीटिंग का आश्वासन दिया, तब जाकर लोग शांत हुए।
यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि नीतिगत फैसलों में यदि जनता की भागीदारी न हो, तो ऐसे निर्णय विवाद का कारण बन जाते हैं। शिक्षा जैसे गंभीर विषय में प्रशासन को और ज़िम्मेदारी के साथ कदम उठाने की ज़रूरत है।
यह खबर KHABAR AB TAK 024 द्वारा दी गई है।
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