भारत ने कड़ा रुख अपनाया: रूस से तेल का निर्यात बरकरार
मोदी सरकार ने एक बार फिर दुनिया को दिखा दिया है कि भारत अब किसी भी दबाव में आने वाला देश नहीं है। अमेरिका समेत पश्चिमी देशों के लगातार दबाव के बावजूद भारत ने रूस से तेल का आयात जारी रखने का ऐलान किया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक मंच पर कच्चे तेल की राजनीति तेज हो चुकी है।
रातों-रात बदली रणनीति
रिपोर्ट्स के मुताबिक बीती रात केंद्र सरकार ने एक हाई-लेवल मीटिंग के बाद यह स्पष्ट कर दिया कि रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना भारत की आर्थिक जरूरत है और इसमें कोई हस्तक्षेप स्वीकार नहीं होगा।
इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर भी देशभर से लोगों की प्रतिक्रिया आ रही है। कई लोगों ने सरकार के इस रुख को "भारत की नई रणनीतिक आज़ादी बताया है।
क्या बोले विदेश मंत्री
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी इसपर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है और जो भी देश हमारे फैसलों पर सवाल उठाएगा उसे करारा जवाब मिलेगा।
भारत बनाम अमेरिका – अब नहीं चलेगी दादागिरी
पिछले कुछ समय से अमेरिका भारत पर दबाव बना रहा था कि वह रूस से तेल लेना बंद करे। लेकिन भारत ने साफ कर दिया कि वह केवल अपनी जनता और अर्थव्यवस्था के भले के लिए फैसले लेगा न कि किसी के दबाव में।
तेल खरीद जारी रहने के क्या होंगे असर?
- देश में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रहेंगे
- महंगाई पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी
- रूस के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे
- भारत की वैश्विक स्थिति और मजबूत होगी
सरकार का यह फैसला एक मजबूत संदेश है – अब भारत अपने फैसले खुद लेता है। जनता को राहत देने के लिए अगर रूस से तेल लेना पड़े तो भारत लेगा और दुनिया को बताकर लेगा।

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