रूस में 8.8 तीव्रता का भूकंप क्या जापान फिर डूबेगा सुनामी से दहशत में पूरी दुनिया
सोमवार को रूस के कामचटका इलाके में 8.8 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया जिसके बाद पूरे प्रशांत महासागर क्षेत्र में सुनामी की चेतावनी जारी कर दी गई। जापान हवाई, अलास्का, न्यूज़ीलैंड, और मैक्सिको जैसे कई देशों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।
यह भूकंप समुद्र की गहराई में आया और इसके झटके इतने तीव्र थे कि रूस के पूर्वी तटीय इलाकों में बिल्डिंगें हिल गईं। खास बात यह रही कि जैसे ही भूकंप आया कुछ ही मिनटों में सुनामी की आशंका की खबरें सोशल मीडिया और न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर वायरल होने लगीं।
जापान में फिर से डर की लहर
2011 की विनाशकारी सुनामी के बाद जापान इस तरह की किसी भी चेतावनी को बेहद गंभीरता से लेता है। इस बार भी जैसे ही रूस में भूकंप की पुष्टि हुई जापान के हॉक्काइडो और अन्य तटीय क्षेत्रों में 40 सेमी तक की लहरें दर्ज की गईं। जापानी सरकार ने समुद्र तटों से दूर रहने और ऊँचाई वाली जगहों पर जाने की सलाह दी है।
हालांकि अभी तक जापान में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। लेकिन सोशल मीडिया पर लोगों के बीच डर और घबराहट साफ देखने को मिल रही है।
ऑपरेशन के बीच भूकंप फिर भी नहीं रुके डॉक्टर
रूस से एक वीडियो वायरल हो रही है जिसमें डॉक्टर एक मरीज की सर्जरी कर रहे होते हैं और उसी दौरान तेज भूकंप आता है। ऑपरेशन थिएटर हिलने लगता है, लेकिन डॉक्टर न डरे, न रुके। यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया है और लोग इन डॉक्टरों को 'फ्रंटलाइन हीरो कह रहे हैं।
इस वीडियो को लेकर लोगों की भावनाएं जुड़ गई हैं और इसने उस खतरे की गंभीरता को उजागर किया है जिससे इस वक्त पूरा क्षेत्र जूझ रहा है।
क्या 2011 दोहराएगा खुद को।
2011 में जापान में 9.0 तीव्रता का भूकंप आया था जिसके बाद आई सुनामी ने हजारों लोगों की जान ली थी और फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट को भी बर्बाद कर दिया था। इस बार का भूकंप भी उसी पैमाने पर है और विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अगर लहरें और गहराई बढ़ी तो बड़ा नुकसान हो सकता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसी घटनाओं की भविष्यवाणी करना अभी भी नामुमकिन है लेकिन समय पर अलर्ट और लोगों की जागरूकता जान बचा सकती है।
दुनियाभर में अलर्ट
अमेरिका चिली इंडोनेशिया, न्यूज़ीलैंड और अन्य देशों ने भी अपने समुद्री तटों पर निगरानी बढ़ा दी है। कई जगहों पर हाई टाइड और असामान्य लहरों की जानकारी मिली है। यह स्थिति अगले 24 घंटों तक बनी रह सकती है।
यह साफ है कि यह सिर्फ रूस या जापान की चिंता नहीं है, बल्कि एक वैश्विक चेतावनी है कि प्रकृति के सामने इंसान कितना छोटा है।
आने वाले घंटे बेहद अहम होंगे। क्या कोई नई तबाही फिर से आने बलि है। या दुनिया इस बार तैयार है यह सवाल सबके मन में है।
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