26 जून को गिर सकती है सरकार INDI: सत्र शुरू होने से पहले सरकार के सामने शुरू हो गई है। चुनौतियां
18वीं लोकसभा का सत्र 24 जून से शुरू होने वाला है। यह सत्र सरकार की किस्मत का फैसला कर सकता है। क्योंकि दो बार सरकार को सदन के अंदर बहुमत साबित करने की स्थिति बन गई है। अगर इसमें थोड़ी सी भी चूक हुई तो मोदी सरकार गिर सकती है। ऐसे में अगर देखा जाए तो विपक्ष काफी मजबूत स्थिति में है। और इस तरह की स्थिति में यह तय माना जा रहा है कि सरकार की मनमानी नहीं चलेगी क्योंकि सरकार का सबसे ज्यादा जोर तो सरकार बचाने में ही लगा रहेगा।
9 जून को राष्ट्रपति दिलाईकी शपथ: राष्ट्रपति ने 9 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शपथ दलाई थी परंतु राष्ट्रपति ने मोदी को बहुमत साबित करने का निर्देशनहीं दिया था अब लेकिन हालत ऐसी बन गए हैं कि मोदी को सदन में बहुमत साबित करना पड़ेगा 26 जून को लोकसभा स्पीकर का चुनाव होना है और संकेत मिल रहे हैं। की इंडिया गठबंधन की अपना उम्मीदवार उतार सकता है। अगर इस समय की बात की जाए तो इंडी के पास 293 सांसदों का बहुमत है वहीं पर अगर इंडिया की बात की जाए तो 236 सांसदों का बहुमत है लगभग अभी एक दर्जन सांसद किसी भी तरफ नहीं है और जो यह सांसद है वह मोदी सरकार की खिलाफ ही जाएंगे यह तय है। अभी मोदी का पल भारी जरूर दिखाई दे रहा है मगर अंदर ही अंदर एनडीए में घमासान मचा हुआ है। इस तरह की स्थिति में कई सांसद सरकार का साथ छोड़ सकती है। ऐसी में समीकरण कभी भी पलट सकती है मोदी सरकार ने पुरानी परंपरा को किनारा कर दिया है पुरानी परंपरा के अनुसार जो स्पीकर पद होता था वह पद साथी के लिए दिया जाता था इस तरह से विपक्ष की तरफ से अगर वोटिंग की मांग कर दी गई और चुनाव में विपक्ष का स्पीकर बन गया तो मोदी सरकार को अपना इस्तीफा देना होगा। क्योंकि यह सरकार की खिलाफ अविश्वास स्पष्ट करता है।
किस तरह सरकार की मुसीबत बढ़ गई: सरकार की मुसीबत लोकसभा स्पीकर पद ने बड़ा दी है। जनता ने सरकार की मनमानी पर ब्रेक लगाने का काम किया क्योंकि 10 साल के बाद लोकसभा में विपक्ष का नेता भी चुना जाएगा विपक्ष का नेता कांग्रेस संसदीय दल का नेता होगा जिसको नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दिया जाएगा। इस कैबिनेट मंत्री जैसे अधिकार दिए जाएंगे सदन की नेता जो प्रधानमंत्री होते हैं उनके बराबर की अधिकार दिए जाएंगे ।

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